देशभक्ति गीत


आजादी का झंडा 
- अलीमुल्ला खां

हम हैं इसके मालिक हिंदुस्तान हमारा 
पाक वतन है क़ौम का जन्नत से भी न्यारा 
ये है हमारी मिल्कियत, हिन्दुस्तान हमारा 
इसकी रूहानियत से रोशन है जग सारा 
कितना क़दीम कितना नईम, सब दुनिया से प्यारा 
करती है ज़रखेज जिसे गंगा-जमुना की धारा 
ऊपर बर्फीला पर्वत पहरेदार हमारा 
नीचे साहिल पर बजता सागर का नक्कारा 
इसकी खान उगल रही है सोना, हीरा, पारा
इसकी शानो शौकत का दुनिया में जयकारा 
आया फिरंगी दूर से ऐसा मंतर मारा 
लूटा दोनों हाथ से प्यारा वतन हमारा 
आज शहीदों ने है तुमको अहले वतन ललकारा 
तोड़ो गुलामी की जंजीरें बरसाओं अंगारा 
हिन्दू मुसलमां, सिख हमारा भाई-भाई प्यारा 
यह है आजादी का झंडा, इसे सलाम हमारा।


वन्दे मातरम्
- बंकिमचन्द्र चटर्जी

वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्। 
शस्य श्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।।

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम्।
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् ।।

सुहासिनीम सुमधुरभाषिणीम् 
सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।।

त्रिंशकोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले 
द्वित्रिंश कोटि भुजै धृत-खर करवाले।

केवले मा तुमि अवले बहुबलधारिणीम् ।। 
नमामि तारिणीम् रिपुदल वारिणीम्।
मातरम् । वन्दे मातरम्।।

श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम् 
धरणीम् भरणीम् मातरम्। वन्दे मातरम्।।


जन गण मन
- रवीन्द्रनाथ टैगोर

जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता।

पंजाब सिंधु गुजरात मराठा, द्राविड़ उत्कल बंगा।

विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा, उच्छल जलधि तरंगा।

तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मांगे।

गायें तव जय गाथा। जन गण मंगलदायक जय हे, 
भारत भाग्य विधाता।

जय हे! जय हे! जय हे ! जय-जय, जय, जय हे!



सर फ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
-राम प्रसाद 'बिस्मिल'

सर फ़रोशी १ की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
 देखना है ज़ोर कितना बाजुए कातिल में है।।

रहरवे राहे मुहब्बत रह न जाना राह में। 
लज़्ज़ते सहरा नवरदी २ दूरिये मंजिल में है।।

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्मां।
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है।।

आके मक़तल ३ में यह क़ातिल कह रहा है बार बार। 
क्या तमन्नाए शहादत भी किसी के दिल में है।।

ऐ शहीदे मुल्को मिल्लत तेरे जज़बों पर निसार। 
तेरी कुरबानी का चर्चा गैर की महफ़िल में है।।

अब न अगले वलवले हैं और न अरमानों की भीड़। 
एक मिट जाने की हसरत अब दिले "बिस्मिल" में है।।


राम प्रसाद "बिस्मिल" "वतन का राग" संग्रहकर्ता, अकसीर सियालकोटी मुद्रक, नश्तर इस्टीम प्रेस, लाहौर -
राष्ट्रीय अभिलेखागार प्रतिबंधित साहित्य-अवाप्ति संख्या, १६३८

१. सर कटाना,

२. भटकना

३. कत्ल की जगह


पुष्प की अभिलाषा
- माखन लाल चतुर्वेदी

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं।
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंदा प्यारी को ललचाऊं।

चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊ । 
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूं भाग्य पर इठलाऊं।

मुझे तोड़ लेना, वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक।
 मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जाएं वीर अनेक।


हिन्दोस्ताँ हमारा
- मोहम्मद इकबाल

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा, 
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा। 
गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में, 
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा।

परबत वो सबसे ऊँचा, हम साया आसमाँ का
वह सन्तरी हमारा, वह पासबाँ हमारा। 
गोदी में खेलती हैं, जिसकी हजारों नदियाँ, 
गुलशन हैं जिनके दम से रश्केजिनाँ हमारा।

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, 
हिन्दी हैं हम, वतन है-हिन्दोस्ताँ हमारा।
यूनान, मिस्त्रो, रूमा, सब मिट गये जहाँ से,
अब तक मगर है बाकी, नामोनिशाँ हमारा।

कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी,
सदियों रहा है दुश्मन, दौरे ज़माँ हमारा, 
'इकबाल' कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में,
मालूम क्या किसी को दर्दे निहाँ हमारा।


हिन्द देश
-विनय चन्द्र मौद्गल्य

हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं, 
रंग रूप, वेष-भाषा चाहे अनेक हैं।।

बेला, गुलाब, जूही, चम्पा, चमेली, 
प्यारे प्यारे फूल गूँथे माला में एक हैं।।

कोयल की कूक न्यारी, पपीहे की टेर प्यारी,
गा रही तराना बुलबुल, राग मगर एक है।।

गंगा, जमुना, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा, कावेरी, 
जाके मिल गई सागर में, हुई सब एक है।।

कदम-कदम बढ़ाये जा
- अज्ञात

कदम कदम बढ़ाये जा खुशी के गीत गाये जा, 
ये जिन्दगी है कौम की तू कौम पर लुटाये जा। 
तू शेरे-हिन्द आगे बढ़, मरने से भी तू न डर,
उड़ाके दुश्मनों का सर जोशे-वतन बढ़ाये जा। 
तेरी हिम्मत बढ़ती रहे, खुदा तेरी सुनता रहे, 
जो सामने तेरे अड़े, तो ख़ाक में मिलाये जा।
'दिल्ली चलो' पुकार के, कौमी निशां सम्हाल के,
लाल किले पर गाड़ के लहराये जा लहराये जा।
(आजाद हिन्द फौज का गीत)

गुलामी से नाम कटा दो बलम
-गौरी दत्त पाण्डे 'गौदा'

गुलामी से नाम कटा दो बलम
अपना गुलामी से नाम कटा दो बलम
तुम भी स्वदेशी में नाम लिखा दो बलम 
मैं भी स्वदेशी प्रचार करूंगी 
मोहे परदे से अब तो हटा दो बलम 
देश की अपने बैरागन बनूंगी 
सब चीर विदेशी जला दो बलम 
अपना गुलामी से नाम कटा दो बलम।


आओ बच्चों तुम्हें दिखायें
- अज्ञात

आओ बच्चों तुम्हें दिखायें झांकी हिन्दुस्तान की।
 इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की।।

वन्देमातरम् । वन्देमातरम् ।

ये है अपना राजपुताना नाज इसे तलवारों पे। 
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे।।
ये प्रताप का वतन पला है आजादी के नारों पे। 
कूद पड़ी थी यहां हजारों पद्मिनियां अंगारों पे।।
बोल रही है कण-कण से कुरबानी राजस्थान की, 
इस मिट्टी से तिलक करें.

वन्देमातरम् ! वन्देमातरम्

देखों मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था। 
मुगलों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था।।
हर पर्वत पे आग जली थी हर पत्थर इक शोला था। 
बोली हर हर महादेव की बच्चा बच्चा बोला था।। 
शेर शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की। 
इस मिट्टी से तिलक करों..

वन्देमातरम् ! वन्देमातरम् !

जलियांवाला बाग ये देखों यहीं चली थीं गोलियां। 
ये मत पूछो किसने खेली यहां खून की होलियां।। 
एक तरफ बन्दूकें दन दन एक तरफ थी टोलियां। 
मरने वाले बोल रहे थे इंकलाब की बोलियां।। 
यहां लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की। 
इस मिट्टी से तिलक करो ये...

वन्देमातरम् ! वन्देमातरम् !


हम होंगे कामयाब
- गिरिजा कुमार माथुर

हम होंगे कामयाब एक दिन 
मन में है विश्वास 
पूरा है विश्वास 
हम होंगे कामयाब एक दिन 
होगी शान्ति चारों ओर एक दिन 
मन में है विश्वास 
पूरा है विश्वास 
होगी शान्ति चारों ओर एक दिन 
नहीं डर किसी का आज के दिन 
मन में है विश्वास 
पूरा है विश्वास 
नहीं डर किसी का आज के दिन 
हम चलेंगे साथ-साथ 
लेके हाथों में हाथ 
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन 
मन में है विश्वास 
पूरा है विश्वास 
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन 
हम होंगे कामयाब एक दिन।

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