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देशभक्ति गीत

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आजादी का झंडा  - अलीमुल्ला खां हम हैं इसके मालिक हिंदुस्तान हमारा  पाक वतन है क़ौम का जन्नत से भी न्यारा  ये है हमारी मिल्कियत, हिन्दुस्तान हमारा  इसकी रूहानियत से रोशन है जग सारा  कितना क़दीम कितना नईम, सब दुनिया से प्यारा  करती है ज़रखेज जिसे गंगा-जमुना की धारा  ऊपर बर्फीला पर्वत पहरेदार हमारा  नीचे साहिल पर बजता सागर का नक्कारा  इसकी खान उगल रही है सोना, हीरा, पारा इसकी शानो शौकत का दुनिया में जयकारा  आया फिरंगी दूर से ऐसा मंतर मारा  लूटा दोनों हाथ से प्यारा वतन हमारा  आज शहीदों ने है तुमको अहले वतन ललकारा  तोड़ो गुलामी की जंजीरें बरसाओं अंगारा  हिन्दू मुसलमां, सिख हमारा भाई-भाई प्यारा  यह है आजादी का झंडा, इसे सलाम हमारा। वन्दे मातरम् - बंकिमचन्द्र चटर्जी वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्। सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्।  शस्य श्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम्। फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् ।। सुहासिनीम सुमधुरभाषिणीम्  सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। त्रिंशक...

कुमाउनी को सँवारने और सिखाने वाली दो महत्वपूर्ण पुस्तकें

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     (यो बीच कुमाउनी में द्वी खाश किताब सामणि ऐ रईं। ' कुमाउनी भाषा' और 'आओ कुमाउनी सीखें' । यों दुैवै किताबोंकि समीक्षा करि रै 'पहरू' कुमाउनी पत्रिका उप संपादक  ललित तुलेरा द्वारा।)   कु माउनी भाषाक ब्याकरण पर कम काम है रौ और यैकै वजैल किताब लै कम देखां भईं। य तरफ कुछेक भाषा बिज्ञानियोंल आपणि कुछेक किताबन में छुटपुट जानकारी दि रै पर कुछेक किताब ब्याकरण पर लेखी रईं जनूमें डाॅ. सुरेश पंत ज्यूकि ‘ कुमाउनी क्रियापदों की पड़ताल ’ (2018 ई.), पूरन चंद्र कांडपाल ज्यूकि ‘ कुमाउनी भाषाक ब्याकरण ’ (2020 ई.), डाॅ. जगत सिंह बिष्ट ज्यूक ‘ कुमाउनी की अस्कोटी बोली का व्याकरण ’ (2007 ई.) कुछ खास छन। कुमाउनी ब्याकरणै क्षेत्र में काम करणी बिद्वानों में कुछ खास नाम- डाॅ. भवानी दत्त उप्रेती, डाॅ. केशवदत्त रुवाली, डाॅ. त्रिलोचन पांडे, डाॅ. नारायण दत्त पालीवाल, डॉ. चंद्रशेखर पाठक, डॉ. शेर सिंह बिष्ट, डाॅ. देव सिंह पोखरिया आदि छन।       अलीबेर ‘ कुमाउनी भाषा ’ नामल डाॅ. पूरन चंद्र जोशी (लखनऊ) ज्यूकि किताब छपि रै। य किताब में चैंतीस पाठ छन जनूमें कुमाउनी भा...

कुमाउनी साहित्य की दो महत्त्वपूर्ण कृतियां : समीक्षा

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कुमाउनी साहित्यक दुणी में जतुकै कवि उदुकै कथाकार रूप में पैठ धरणी सशक्त लेखार जगदीश जोशी ज्यूक ‘आँखिरी पात’ और ‘मेरि लेखि चिट्ठि म्यारै नाम’ किताब सामणि ऐरी। कुमाउनी साहित्य कैं नई तराण दिणी पोथि छन, यो दुवै दमदार किताब कुमाउनी अनुवाद और संस्मरण विधाक जरूरी किताबाक रूप में देखां है रईं।  यों किताबोंक समीक्षा करनई कुमाउनी युवा समीक्षक-  ललित तुलेरा   । (1).      ‘ आँ खिरी पात’ कुमाउनी साहित्यकि दुणी में भौत खास और बिशेष पोथीक रूप में हमर सामणि ऐ रै। य पोथी यै वील भौत बिशेष छु कि इमें दुनी भरिक 14 कालजयी कहानीकारोंक 14 कहानियोंक कुमाउनी भाषा में अनुवाद करि राखौ। इन साहित्यकारन में साहित्यक नोबेल पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार लै छन।             अमेरिकी साहित्यकार ओ.हेनरी क ‘द लास्ट लीफ’ कहानिक  कुमाउनी रूप ‘आँखिरी पात’ आधार पर किताबक नाम पड़ि रौ। य चर्चित कहानि पर ‘ओ. हेनरीज फुल हाउस’ नामल 1952 में चलचित्र बणौ और दुबार 1983 में 24 मिनटकि फिलम बणै। 2013 में बणी बाॅलीवुड फिलम ‘लुटेरा’ लै यई कहानि पर आधारित बणाई...

कुमाउनी भाषा में इस वर्ष आयोजित आठ लेखन पुरस्कार योजनाएं

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                         कुमाउनी भाषा में ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति’ कसारदेवी, अल्मोड़ा (उत्तराखंड) व ‘पहरू’ कुमाउनी मासिक पत्रिका द्वारा कुमाउनी भाषाक बिकास और साहित्य कैं बढ़ावा दिणै लिजी और कुमाउनी भाषा में साहित्याक तमाम बिधाओं में लेखन योजना चलाई जानी। यो साल 2022 में लै कुमाउनी में गद्य और पद्य बिधान में लेखन योजना चलाई जानई। इन पुरस्कार योजनाओंक रचनाकारों कैं ‘पहरू’ व समिति  द्वारा  हर साल उरायाई जाणी ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में पुरस्कार दिई जां।  अलीबेर यों   लेखन योजना चलाई जानई- 1. गोविन्द सिंह बिष्ट स्मृति बाल कविता लेखन पुरस्कार योजना श्रीमती नीलम नेगी, से.नि. प्रधानाचार्य, मु. चौधरीखोला, अल्मोड़ा  द्वारा दिई मधतल कुमाउनी भाषा में ‘बाल कविता’ लेखन कें बढ़ावा दिनै लिजी ‘गोविन्द सिंह बिष्ट (पूर्व विधायक) स्मृति बाल कविता लेखन पुरस्कार योजना’ चलाई जनै। यो लेखन योजना में क्वे लै उमराक लेखार भाग ल्ही सकनी। हरेक प्रतिभागी कैं पांच बाल कविता भेज...

उत्तराखंड के परंपरागत बालगीतों की चर्चित किताब का नाम है : घुघुति बासूति

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                      ललित तुलेरा बागेश्वर, (उत्तराखंड)  ( ' घुघूति बासूति' इन दिनों बच्चों के बीच ही नहीं वरन आम पहाड़ी के बीच भी खासा लोकप्रिय हुई है। कुछ साल पहले जब यह डीजिटल रूप में प्रस्तुत थी तब भी काफी सराही और पसंद की गई थी। यहां ' घुघुति बासूति ' किताब की समीक्षा की गई है। इस किताब के संकलक  हेम पंत , पिथौरागढ़ हैं। समीक्षक  ललित तुलेरा  हैं। )         आ पनी भाषा, संस्कृति और पहाड़ से गहरा जुड़ाव रखने व पहाड़ी सरोकारों से गहरे जुड़े  हेम पंत  द्वारा उत्तराखंड के बालगीतों को संकलित करके किताब रूप में छापा गया है। इस पुस्तक का  नाम उन्होंने ' घुघूति बासूति'   रखा है। वही बालगीत जो बच्चों को रचनात्मकता की ओर खींचते हैं, बच्चों का व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र निर्माण और अपने परिवेश, संस्कार और समाज को जानने में मददगार होते हैं।         यह किताब उत्तराखंड के  कुमाउनी व गढ़वाली समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से प्रचलित बालगीतों क...

उत्तराखंडी समाज में बरसों बै चली आई बालगीतोंकि बिरासतकि किताब : घुघुति बासूति

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ललित तुलेरा बागेश्वर, (उत्तराखंड)  ( यां ' घुघुति बासुति ' किताबकि कुमाउनी भाषा में समीक्षा करी जैरौ। य किताबक संकलक हेम पंत , पिथौरागढ़ छन। समीक्षक ललित तुलेरा छन। )        आ पणि भाषा, संस्कृति और स्वर्ग जस पहाड़ दगै गैल जुड़ाव धरणी और प्रेम करणी हेम पंत द्वारा उत्तराखंडाक बालगीतन कैं एकबट्यै बेर किताब रूप में छापी जैरौ। य किताबक नाम उनूल ' घुघूति बासूति' धरि रौ। उईं बाल गीत जो नानतिनां कैं रचनात्मकता तरफ खींचनी, नानतिनोंक व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र निर्माण और आपण परिवेश, संस्कार और समाज कैं जाणन में मधतगार हुनी।        य किताब उत्तराखंडाक कुमाउनी व गढ़वाली समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूपल चली आई बालगीतोंक छु। बालगीत कुमाउनी, गढ़वाली, जोहारी, रँवाई लोकभाषाओं में छन। कुल 55 बालगीत इमें एकबट्याई छन। जनूमें 24 गढ़वाली बालगीत, 30 कुमाउनी बालगीत, रँवाई बोलीक 2 बालगीत,   जोहारी बोलिक 03 बालगीत और  एक बालगीत हिंदी और कुमाउनी में लै  शामिल कर राखीं। कुमाउनी समाज में हर्याव, दुतिया समेत हौर त्यारोंक मौक पर सयाणों द्व...

कुमाउनी भाषा में जापान की दो लोक कथाएं

कुमाउनी अनुवाद-  डॉ.देव सिंह पोखरिया अल्मोड़ा (उत्तराखंड)