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कुमाऊं में प्रचलित होली संग्रह का विमोचन

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अल्मोड़ा । कुमाऊं में प्रचलित होलियों का संकलन 'कैले बांधी चीर...' पुस्तक का विमोचन 'पहरू' कुमाउनी मासिक पत्रिका कार्यालय में हुआ।  होलियों का यह संकलन 'कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति' कसारदेवी अल्मोड़ा से प्रकाशित हुई है।            यह किताब कुमाउनी लेखक शिवदत्त पांडे ने तैयार की है जिसमें उन्होंने तीन दर्जन से अधिक होलियों को संकलित किया है। शिवदत्त पांडे अल्मोड़ा जिले में स्थित ग्राम कफलनी (दन्या) के निवासी हैं। वे लंबे समय से अपनी मातृभाषा कुमाउनी के गद्य विधाओं में लेखन के कार्य में जुटे हैं।         किताब विमोचन के अवसर पर 'पहरू' संपादक- डॉ. हयात सिंह रावत, लेखक शिवदत्त पांडे, साहित्यकार अनूप तिवारी, 'पहरू' उप संपादक शशि शेखर जोशी व ललित तुलेरा आदि मौजूद रहे।

हल्द्वानी में पहली बार कुमाउनी युवा करेंगे आपनी मातृभाषा का आयोजन

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ललित तुलेरा,  अल्माड़।   उत्तराखंड भाषाओं मामिल में सम्पन्न छु। यां कएक संस्कृतियोंक लोग रूनी और उनरि आपणि भाषा लै संपन्न छन। उत्तराखंड में खास रूपल कुमाउनी, गढ़वाली द्वी लोक भाषा जादे चलन में छन, जनूकैं पहाड़ी भाषान में गणी जां। इन द्वी भाषाओंक लोग आपणि भाषाओं बिकास में भौत लंब टैम बै प्रयास करनै रई छन।       कुमाउनी युवाओंक संगठन 'उज्याव' उणी वा्ल २४ दिसंबर २०२३ हुं हल्द्वाणि में पैंल बार एक दिनी कार्यक्रम करण लागि रौ। उज्याव संगठनक संस्थापक युवा रचनाकार दीपक भाकुनी ल बता कि कार्यक्रम में भाषाक बिकास में काम करनेर युवाओं कैं सम्मानित करी जा्ल। य कार्यक्रम में भाषा पर विमर्श, व्याख्यान और कवि सम्मेलन लै करी जा्ल।  ● 'उज्याव' संगठनक परिचय- 'उज्याव' कुमाउनी, भाषा साहित्य व संस्कृतिक बिकास में कुमाउनी युवा पीढ़ीक योगदानै लिजी कुमाउनी युवाओं परयासोंल शुरू करी एक पहल छु, जां उ आपणि पछयाण, आपणि दुदबोलिक सज-समावै लिजी एक ह्वाल। य पहल द्वारा युवा आपणि मातृभाषा कुमाउनी दगै जुड़ाल।          ...

शशि शेखर जोशी और जनार्दन उप्रेती को मिलेगा पुरस्कार

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अल्मोड़ा। इस वर्ष का ‘कुसुम पंत स्मृति कुमाउनी युवा रचनाकार पुरस्कार’ शशि शेखर जोशी को और इस वर्ष का ‘शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ कुमाउनी कविता पुरस्कार’ जनार्दन उप्रेती ‘जन्नूदा’ को दिया जाएगा। ये पुरस्कार ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और ‘पहरू’ कुमाउनी मासिक पत्रिका की ओर से आगामी 04, 05 व 06 नवंबर 2023 को पिथौरागढ़ में आयोजित 15 वे ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में दिए जाऐंगे। समिति सचिव डाॅ. हयात सिंह रावत ने बताया कि पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद शशि शेखर जोशी और जनार्दन उप्रेती ‘जन्नूदा’ को कुमाउनी भाषा और साहित्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए चुना गया है। शशि शेखर जोशी शशि शेखर जोशी का जन्म माता श्रीमती कमला जोशी और पिता षष्टी दत्त जोशी के घर में 16 सितंबर 1978 को अल्मोड़ा जिले के ग्राम पभ्या में हुआ। बचपन से ही प्रतिभाशाली शशि शेखर कुमाउनी भाषा में देश और अंतरराष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर लेखन करते हैं। ‘पहरू’ के संपादक मंडल में सेवा दे रहे जोशी कुमाउनी भाषा के संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं।   ...

ललित सिंह सिराड़ी और केशर सिंह डंग्सेरा को मिलेगा साहित्य पुरस्कार

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  अल्मोड़ा।  इस वर्ष का ‘राम सिंह लोधियाल स्मृति कुमाउनी साहित्य पुरस्कार’ ललित सिंह सिराड़ी को और ‘गंगा अधिकारी स्मृति कुमाउनी साहित्य पुरस्कार’ केशर सिंह डंग्सेरा को दिया जाएगा। ये पुरस्कार ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और ‘पहरू’ कुमाउनी मासिक पत्रिका की ओर से आगामी 04, 05 व 06 नवंबर 2023 को पिथौरागढ़ में आयोजित 15 वे ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में दिए जाऐंगे।  समिति सचिव डाॅ. हयात सिंह रावत ने बताया कि पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद इन दोनों साहित्यकारों को कुमाउनी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए चुना गया है।                     ललित सिंह सिराड़ी साहित्यकार ललित सिंह सिराड़ी का जन्म 14 मई 1942 को अल्मोड़ा जिले के ग्राम सिराड़ में माता मोतिमा देवी और पिता गंगा सिंह सिराड़ी के घर हुआ। श्री सिराड़ी कुमाउनी साहित्य में एक जाना पहचाना नाम है। वे लंबे अरसे से कुमाउनी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। कुमाउनी साहित्य को आगे बढ़ाने में सिराड़ी का खासा योगदान है। लेखक के रूप में वे ग...

डाॅ. दिवा भट्ट और भारती पांडे को मिलेगा साहित्य पुरस्कार

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  अल्मोड़ा।   इस वर्ष का ‘पुष्पलता जोशी स्मृति कुमाउनी साहित्य पुरस्कार’ डाॅ. दिवा भट्ट को और ‘मुन्नी जोशी स्मृति कुमाउनी साहित्य पुरस्कार’ भारती पांडे को दिया जाएगा। ये पुरस्कार ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और ‘पहरू’ कुमाउनी मासिक पत्रिका की ओर से आगामी 04, 05 व 06 नवंबर 2023 को पिथौरागढ़ में आयोजित 15 वे ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में दिए जाऐंगे। समिति सचिव डाॅ. हयात सिंह रावत ने बताया कि पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद इन दोनों साहित्यकारों को कुमाउनी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए चुना गया है। डाॅ. दिवा भट्ट           साहित्यकार डाॅ. दिवा भट्ट का जन्म पिथौरागढ़ जिले के ग्रा.-बेलकोट में माता भागीरथी देवी और पिता श्री जयनारायण पांडे के घर 13 मई 1952 को हुआ। हिंदी व कुमाउनी में समान अधिकार से लेखन करने वाली दिवा भट्ट लेखन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने समसामयिक बिषयों के साथ ही जीवन के यथार्थ को अपने लेखन का विषय बनाया है। अभी तक डाॅ. भट्ट की हिंदी में ‘अक्षरों का पुल’, ‘अनिक...

शशि शेखर जोशी को मिलेगा 2023 का युवा रचनाकार पुरस्कार

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अल्मोड़ा। कुमाउनी युवा लेखक शशि शेखर जोशी को इस वर्ष का 'कुसुम पंत स्मृति कुमाउनी युवा पुरस्कार'   दिया जाएगा। पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद उन्हें मातृभाषा कुमाउनी में लेखन के क्षेत्र में योगदान के लिए चुना गया है। समिति सचिव डॉ. हयात सिंह रावत ने जानकारी दी कि आगामी 04, 05 व 06 नवंबर 2023 को पिथौरागढ़ में आयोजित तीन दिवसीय 15 वें 'राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन' में उन्हें इस पुरस्कार से पुरस्कृत किया जाएगा। यह सम्मेलन कुमाउनी भाषा की प्रसिद्घ मासिक पत्रिका 'पहरू' और 'कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति' की ओर से आयोजित हो रहा है।                                शशि शेखर जोशी 16 सितंबर 1978 को अल्मोड़ा जिले के पभ्या गांव में माता कमला जोशी व पिता षष्ठी दत्त जोशी के घर जन्मे शशि शेखर जोशी बचपन से ही प्रतिभाशाली रहे हैं। कुमाउनी भाषा में वे देश और अंतरराष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर लेखन करते हैं। 'पहरू' पत्रिका के संपाद...

गिरीश चंद्र जोशी को मिलेगा ‘विक्टोरिया क्राॅस कै. गजे घले पुरस्कार’

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पिथौरागढ़। इस वर्ष का ’विक्टोरिया क्राॅस कै. गजे घले पुरस्कार’ गिरीश चंद्र जोशी को दिया जाएगा। यह पुरस्कार ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और ‘पहरू’ की ओर से आगामी 04, 05 व 06 नवंबर 2023 को पिथौरागढ़ में आयोजित 15 वां ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में दिया जाएगा। पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद अल्मोड़ा निवासी गिरीश चंद्र जोशी को कुमाउनी लेखन में उल्लेखनीय योगदान के लिए चुना गया है। समिति सचिव डाॅ. हयात सिंह रावत ने बताया की पुरस्कार के रूप में उन्हें पांच हजार एक सौ रूपये की नकद धनराशि, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।  गिरीश चंद्र जोशी 01 मई 1954 को अल्मोड़ा जिले के ग्रा.-घुराड़ी लोधिया में माता मोहिनी देवी और पिता श्री लीलाधर जोशी के घर जन्मे गिरीश चंद्र जोशी अपनी मातृभाषा कुमाउनी में लेखन में कई सालों से सक्रिय हैं। हिंदी और कुमाउनी में एक समान लेखनी चलाने वाले गिरीश जोशी का कुमाउनी के प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान है। कुमाउनी मासिक पत्रिका ‘पहरू’ को देश भर में कुमाउनी जन-जन तक पहुंचाने में गिरीश जोशी का विशेष योगदान है। अ...

कुमाउनी पत्रकारिता का इतिहास History of kumauni journalism

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    ■ ललित तुलेरा tulera.lalit@gmail.com       कु माउनीक लै हौर भाषानकि चारि पत्रकारिताक आपण इतिहास छु। हालांकि कुमाउनीक खुद आपण पछिल करीब एक हजार सालोंक इतिहास छु पर पत्रकारिताक शुरूवात कुमाउनी में आज बै सिरफ आठ दशक पैंली हैछ। कुमाउनी में यै है पैंली कुमाऊं बै निकलणी साप्ताहिक अखबारों में क्वे बा्ंज कविता, गीत, किस्स छपी करछी। कुमाउनी में बिधिवत पत्रकारिताकि शुरूवात अल्माड़ नगर बै ‘ अचल ’ मासिक पत्रिका दगाड़ भैछ। य पत्रिकाक पैंल अंक फरवरी 1938 में निकलौ। जीवन चंद्र जोशी (24 अगस्त 1901- 30 अप्रैल 1980) य पत्रिकाक संपादक छी। उनार दगाड़ संपादनक काम में तारादत्त पांडे और धर्मानंद पंत लै छी। 'अचल' पत्रिकाक कबर           जब कुमाऊं अंचल बै यांकि लोकभाषा और एक जमान में राजभाषा में यस सार्थक काम हुणौछी तब ‘अचल’ पत्रिका लिजी बिख्यात रचनाकार रवीन्द्रनाथ टैगोर और रूसी कलाकार निकोलस रोरिक ल शुभकामना संदेश भेजी और ऊ ‘अचल’ में छपी। रवीन्द्रनाथ टैगोर ज्यूल लेखौ- ‘‘ ऐसी पत्र-पत्रिकाओं की बहुत आवश्यकता है जो भारतवर्ष के ...

डाॅ. आनंदी जोशी को मिलेगा ‘बहादुर बोरा ‘श्रीबंधु’ कुमाउनी कथा साहित्य पुरस्कार

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पिथौरागढ़। इस वर्ष का ‘बहादुर बोरा ‘श्रीबंधु’ कुमाउनी कथा साहित्य पुरस्कार’ डाॅ. आनंदी जोशी को दिया जाएगा। यह पुरस्कार ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और ‘पहरू’ की ओर से आगामी 04, 05 व 06 नवंबर 2023 को पिथौरागढ़ में आयोजित 15 वां ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में दिया जाएगा। कथा साहित्य पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद पिथौरागढ़ निवासी डाॅ. आनंदी जोशी  को कुमाउनी कथा साहित्य में उल्लेखनीय लेखन के लिए चुना गया है। समिति सचिव डाॅ. हयात सिंह रावत ने बताया की पुरस्कार के रूप में उन्हें पांच हजार एक सौ रूपये की नकद धनराशि, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।  डाॅ. आनंदी जोशी 05 जुलाई 1962 को पिथौरागढ़ के ग्रा.-चहज, गंगोलीहाट में माता सरस्वती जोशी और पिताजी श्री भोलादत्त जोशी के घर जन्मी डाॅ. आनंदी जोशी अपनी मातृभाषा कुमाउनी में लेखन में कई सालों से सक्रिय हैं। पिथौरागढ़ निवासी डाॅ. आनंदी जोशी का कुमाउनी में कहानी लेखन में विशेष योगदान है। वह कहानी के अलावा कविता, लेख आदि साहित्यिक विधाओं में कलम चलाती हैं। डाॅ. आनंदी जोशी अपने कहान...

हेमराज बिष्ट को मिलेगा ‘दिलीप सिंह खेतवाल स्मृति कर्मवीर पुरस्कार’

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पिथौरागढ़। इस वर्ष का ‘दिलीप सिंह खेतवाल स्मृति कर्मवीर पुरस्कार’ हेमराज बिष्ट को दिया जाएगा। यह पुरस्कार ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और ‘पहरू’ की ओर से आगामी 04, 05 व 06 नवंबर 2023 को पिथौरागढ़ में आयोजित 15 वां ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में दिया जाएगा। कर्मवीर पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद पिथौरागढ़ निवासी हेमराज बिष्ट को कुमाउनी संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय लेखन के लिए चुना गया है। समिति सचिव डाॅ. हयात सिंह रावत ने बताया की पुरस्कार के रूप में उन्हें पांच हजार एक सौ रूपये की नकद धनराशि, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।  हेमराज बिष्ट 12 मई 1964 को पिथौरागढ़ जिले के ग्रा.- डुंगरी-मिताड़ी में माता भागीरथी देवी और पिताजी श्री गोपाल सिंह बिष्ट के घर जन्मे हेमराज बिष्ट कुमाउनी संस्कृति को संवारने और आगे बढ़ाने में कई सालों से सक्रिय हैं। हेमराज बिष्ट ने वर्ष 1986 में ‘पर्वतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कला समिति’ की स्थापना की, जिसे ‘नवोदय पर्वतीय कला केन्द्र’ रूप में  भी  जाना जाता है। उन्होंने पिथौरागढ़ की ...

'मृग मरीचिका' कहानी संग्रह किताब का विमोचन

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अल्मोड़ा।  'हरेला इनोवेशन' संस्था के तत्वावधान में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) से सेवानिवृत्त  रतन सिंह बंगारी का कहानी संग्रह ' मृग मरीचिका ' का शहर के प्रतिष्ठान 'बैठक' में विमोचन किया गया। 'मृग मरीचिका' किताब पर समीक्षात्मक व्याख्यान देते हुए डॉ. गजेन्द्र बटोही ने कहा कि रतन सिंंह बंगारी कृत 'मृग मरीचिका' में लिखित कहानियां मध्य हिमालय के पहाड़ी समाज की अभिव्यक्ति हैं और पहाड़ का सामाजिक जनजीवन  इन कहानियों में दृष्टिगोचर होता है। रतन सिंह बंगारी ने कहा कि उनकी पृष्ठभूमि लेखन से जुड़ी नहीं रही परंतु यह कहानी संग्रह लिखित अभिव्यक्ति के रूप में उनका पहला प्रयास है। उन्होंने कहा कि कहानियां लिखने का उनका प्रेरक जीवन का संघर्ष और समाज रहा है।  सेवा निवृत्त शिक्षिका नीलम नेगी ने कहा कि साहित्य मानव जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आधुनिक युग में हमें साहित्य के महत्व को समझना होगा तथा युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया से इतर साहित्य को अपने जीवन से जोड़े रखना चाहिए।  अध्यक्षीय भाषण में साहित्यकार त्रिभुवन गिरि ने कहा कि 'मृग मरीचिका...

हिंदी कविताएं : ललित तुलेरा (भाग-२)

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पिताजी का लीसे का गमला हाथ की लकीरें तो हो गई हैं ध्वस्त ऐसिड और लीसे से, पर  हाथ की लकीरें   चीड़ के पेड़ों पर  बना दिए हैं पिताजी ने।  उन लकीरें से निकलता है लीसा, लकीरों से होकर लीसा कील में टंगे गमले में पहुंचता है, जैसे पिताजी पहुंचते हैं घर से तैयार होकर  *लिसुवा की ड्रैस में रोज अपने लीसे के गमले के पास। लीसे का गमला भरता है कई दिनों बाद पर उससे पहले उसे बचाए रखना होगा राहगीरों से, जंगल के जानवरों से आंधी से और आग से। कई बार  गर्मीयों में आग पहुंच जाती है घर के सामने पहाड़ी पर चीड़ के जंगल में पिताजी के लीसा कंपार्टमेंट में तब गमले के जल जाने के डर से रात को नींद नहीं आ पाती लीसे के गमले का बचना जरूरी है कनस्तर को भरने के लिए लीसा भरा कनस्तर का बचना जरूरी है  परिवार के लिए लीसे का गमला  टंगा है आज भी चीड़ के पेड़ पर  लकीरों से लीसा भर रहा है  पिताजी के लीसे के गमले में। *लिसुवा- मूल कुमाउनी शब्द 'लिसू' से बना है। जिसका मतलब है- लिसा निकालने वाला वाला श्रमिक)  ●●● छत टपकती है चातुर्मास में मेरे घर ...

बढ़ती मानव आबादी से धरती को खतरा तो नहीं? हम कितने सजग हैं इस ओर : विश्व जनसंख्या दिवस २०२३

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●  ललित तुलेरा ई.मेल- tulera.lalit@gmail.com      ध रती में मनखियकि बिकास यात्रा में कएक मोड़ आईं। एक बखत छी जब मनखी जङव में अलग-अलग समुदाय में रूंछी। आस्ते-आस्ते उ शहरों में रूण लागौ, जां आबादी लै बढ़ते रै। जब मनखियल जनगणना करनकि तरकीब खोजो तो धरती में मनखियोंकि संख्याक लै जानकारी मिलण लागै। एक बखत छी जब धरती में मनखीयोंकि संख्या एक अरब है लै कम छी। वांई आज धरती में मनखियोंकि गिन्ती आठ अरब है बेर मलि पुजि गे। इतनि ठुलि आबादी हमुकैं कएक समस्या लै ठा्ड़ करनै। 1987 में जब दुनियकि आबादी 5 अरब भै तो बढ़ते जनसंख्याक चिंता कैं देखि बेर साल 1989 में ‘संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम‘ कि ‘गवर्निंग काउंसिल‘ ल 11 जुलाई हुणि ‘विश्व जनसंख्या दिवस‘ क तौर पर मनूणक फैसाल ल्हे। यैकै अघिल साल 1990 में पैंल बार दुनियांक 90 देशन में ‘विश्व जनसंख्या दिवस‘ मनाई गो। तब बै ‘विश्व जनसंख्या दिवस‘ हर बरस 11 जुलाई हुं मनाई जां।          धरती में मनखियोंक संख्या में इजाफा हुण हमुकैं खुशी दिंछ पर वांई उरातार बढ़न लागी लोगनकि संख्या हमर भविष्यक लिजी अभिशाप लै बणि गे। यैल जां पर...

लेखन योजनाएं

   1. सरस्वती भट्ट स्मृति बाल नाटक लेखन पुरस्कार योजना       श्री देवकीनंदन भट्ट ‘मयंक’ से.नि. सीनियर इंस्पेक्टर (टैक्नीकल) सीमा सुरक्षा बल, निवासी-तीन पानी हल्द्वानी द्वारा आपणि इजकि याद में दिई आर्थिक मधतल कुमाउनी भाषा में बालोपयोगी नाटक लेखन कैं बढ़ावा दिनै लिजी ‘ सरस्वती भट्ट स्मृति बाल नाटक लेखन पुरस्कार योजना’  चलाई जनै। यो योजना में क्वे लै उमराक लेखार भाग ल्ही सकनी। बाल नाटक अणछपी एवं मौलिक हुण चैं। रचना में शुरू या आंखिर में कांई लै आपण नाम झन लेखिया। रचना भेजन बखत जो चिट्ठी भेजला, उमें आपण नाम और रचनाक शीर्षक लेखि दिया। बाल नाटक 31 अगस्त 2023 तक पुज जाण चैं। प्राप्त रचनाओं बटी निर्णायक मंडल द्वारा तीन रचनाओं कैं छांटी जा्ल और उनर लेखारों कैं पुरस्कृत करी जा्ल और बाल नाटकों कैं ‘पहरू’ में छापी जा्ल। 2. खीम सिंह ऐठाणी स्मृति कुमाउनी बाल कविता लेखन पुरस्कार योजना      श्री लक्ष्मण सिंह ऐठाणी, से.नि. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, रैथमी- ग्रा.-भानी (भराड़ी), जि.-बागेश्वर, हाल-मल्ला चैसार, अल्मोड़ा द्वारा आपण बौज्यूकि याद में दिई आर्थिक मधतल कु...